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Messages - gursharn

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Version 2


I'd Give Money to all the Poor Women and Empower them


I asked my friend's son what he wanted to be when he grows up. He said he wanted to be Prime Minister some day.

Both of his parents, feminists, were standing there, so I asked him, 'If you were Prime Minister, what would be the first thing you would do?'

He replied, 'I'd give money to all the poor women and empower them.' His parents beamed with pride.

'Wow...what a worthy goal.' I told him. 'But you don't have to wait until you're Prime Minister to do that. You can come over to my house and mow the lawn, pull weeds, and sweep my yard, and I'll pay you Rs.500. Then I'll take you over to the grocery store where a homeless lady hangs out, and you can give her the same 500 rupee note for food and new set of clothes .'

He thought that over for a few seconds, then he looked me straight in the eyes and asked, ' Why doesn't the homeless lady come over and do the work, and you can just pay her Rs.500?'

I said, 'She is waiting for someone to take someone else's money and give her the money because she is women.'

His parents still aren't speaking to me.

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I'd Give Money to all the Poor Women and Empower them



I asked my friend's son what he wanted to be when he grows up. He said he wanted to be Prime Minister some day.

Both of his parents, feminists, were standing there, so I asked him, 'If you were Prime Minister, what would be the first thing you would do?'

He replied, 'I'd give money to all the poor women and empower them.' His parents beamed with pride.

'Wow...what a worthy goal.' I told him. 'But you don't have to wait until you're Prime Minister to do that. You can come over to my house and mow the lawn, pull weeds, and sweep my yard, and I'll pay you Rs.500. Then I'll take you over to the grocery store where a homeless lady hangs out, and you can give her the same 500 rupee note for food and new set of clothes .'

He thought that over for a few seconds, then he looked me straight in the eyes and asked, ' Why doesn't the homeless lady come over and do the work, and you can just pay her Rs.500?'

I said, 'Welcome to the real world of equality.'

His parents still aren't speaking to me.

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हसो और हसाओ / Re: Husband vs Wife
« on: May 10, 2017, 11:14:36 AM »
कल रात एक शादी में गया ।

वहां, जैसे ही डीजे ने यह गाना बजाया…
‘जिसको डांस नहीं करना वो जाकर अपनी भैंस चराए’

ज्यादातर पति अपनी पत्नी को खाना खिलाने ले गए !!


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MRA Litrature / KESHAV & SHARMA JI : EQUALITY
« on: May 09, 2017, 05:21:07 PM »
KESHAV & SHARMA JI : EQUALITY

MEN'S HUB


शर्मा : नमस्कार शर्मा जी
केशव : आइये केशव जी
शर्मा : आज एक काम से आया हूँ आपके पास
केशव : बताइये अगर मेरे हाथ मैं हुआ तो
शर्मा : अपने वर्मा जी की वाइफ का आपने ट्रांसफर कर दिया
केशव : हां वह छुटी पर चली गयी है अभी तो
शर्मा : उनका ट्रांसफर रुकवाना होगा आपको
केशव : क्यों भाई ट्रांसफर ही तो हुआ है
शर्मा : महिला हैं इतनी दूर नहीं जा पाएंगी
केशव : तो नौकरी छोड़ सकती है
शर्मा : सरकारी नौकरी ऐसे ही छोड़ी जाती है क्या
केशव : सरकारी नौकरी है तो ड्यूटी पर भी जाना ही होगा न | जिस गाओं मैं भिजवाया है वहां जरूरत है
शर्मा : गाओं मैं कोई आदमी (पुरुष) चला जायेगा
केशव : ऐसा क्यों शर्मा जी जो तकलीफ महिला को है वही तकलीफ पुरुष को भी तो होगी ना
शर्मा : हम्म
केशव : चलिए ऐसा करते है वर्मा जी की वाइफ लिख कर दे दें की "मैं किसी पुरुष के बराबर मेहनत नहीं कर सकती या नहीं करना चाहती"
शर्मा : ऐसा कैसे आप क्या महिलाओं को पुरुषों से कम मानते हैं
केशव : नहीं इसी लिए ही तो ट्रांसफर किया है
शर्मा : आप उनकी सुरक्षा के बारे मैं भी तो सोचिये
केशव : चलिए फिर यह लिख कर दे दें "जिस गाओं मैं मेरा ट्रांसफर किया जा रहा है उस गाओं के सभी पुरुष बलात्कारी तथा अपराधी है"
शर्मा : ऐसा कैसे हो सकता है
केशव : चलिए आप बताइये की क्या हो सकता है
शर्मा : वर्मा जी की वाइफ को घर के सब काम करने होते हैं ड्यूटी पर जाने से पहले
केशव : यह उनके घर का मामला है जिससे मेरा कोई लेना देना नहीं है
शर्मा : वास्तव मैं आपको कोई लेना देना नहीं है |
केशव : नहीं
शर्मा : आपकी अपनी लड़की होती तब भी यही कहते आप
केशव : मैं अपनी लड़की से कहता की एक नौकर या नौकरानी रख ले उचित वेतन पर
शर्मा : केशव जी आप नहीं करेंगे तो क्या ट्रांसफर नहीं रुकेगा
केशव : बिलकुल रुकेगा मेरे ऊपर भी बहुत लोग हैं निचे भी जिनके लिए सिर्फ यही मायने रखता है की किसी महिला को कोई तकलीफ न हो
शर्मा : तो आप बिलकुल इंकार कर रहे हैं
केशव : अगर आप महिला होने के कारण ट्रांसफर रोकने को कहते हैं तो साफ इंकार है




NOTE : Based on News Published in News Paper

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News & Information / This is the age when men are the most lonely
« on: May 09, 2017, 02:41:08 PM »
This is the age when men are the most lonely

EVENING STANDARD

Feeling lonely and socially isolated is something that you’d most likely associated with the elderly generation, particularly in the capital.

But according to new research, a ‘silent epidemic’ is sweeping men in their thirties, with millions of men in the UK feeling vulnerable and isolated.

The study by the Jo Cox Commission, which was released as part of Spotlight on Men month, found that an estimated eight million (35 per cent) of men feel lonely at least once a week, while nearly three million (11 per cent) battle with these feelings every day.

Much like mental health, there is a stigma surrounding loneliness, and people tend not to ask for help because of embarrassment.

According to the study's results, more than one in 10 men say they are lonely, but will not admit it to anyone.

The age when men are most likely to hit ‘peak loneliness’ is 35. This could be down to a number of factors including unemployment, relationship break-ups, bereavement or moving away from family and friends.

This is also the age that men are most likely to have few or no regular friends with 9 per cent of 35-year-olds admitting that they do not see anyone regularly.

By 2030, the commission predicts that around 1.5 million men will live alone in England and Wales by 2030. These men are particularly vulnerable to feeling lonely because they are less likely to socialise outside of work and family through activities, the study found.

Labour MP Rachel Reeves, who co-chairs the commission, said: "Loneliness is a silent epidemic hidden inside every family and community in the UK and can affect any one of us and at any time.

"For the next month, we will explore how and why men experience loneliness and, most importantly, shine a light on the practical steps that can be taken to combat it.

"Now is the time to break the silence and start a conversation."

The month-long campaign now aims to start a national conversation about the scale and impact of loneliness in the UK, in a bid to tackle the epidemic.

People can use the hashtag #happytochat on Twitter and Facebook to raise awareness of loneliness among young men.


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सुसाइड नोट में लिखा...पत्नी और ससुर से तंग आकर दे रहा हूँ जान....

PUNJAB KESRI


मोहाली (राणा) : फेज-1 में रहने वाले एक व्यक्ति ने पंखे से फंदा लगा लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की जांच की। मौके से पुलिस को एक सोसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें पत्नी, सास और अन्यों को मौत के जिम्मेदार ठहराया गया।  पुलिस ने बताया कि मुकेश (39) ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह अपनी पत्नी और ससुर से तंग आकर जान दे रहा है। मृतक का पिता बी.एस. अतरी पिंजौर में रहता हैं, जबकि मुकेश मोहाली फेज-1 में अकेला रह रहा था। पहले उसकी 10 साल की बेटी भी साथ रहती थी लेकिन पती-पत्नी में झगड़े के चलते मृतक की पत्नी करीब 6 महीने पहले बेटी को लेकर अपने मायके मुंडी खरड़ चली गई। तब से मुकेश यहां अकेला रह रहा था। मुकेश के पिता ने आरोप लगाया कि विजय लक्ष्मी उनके बेटे को काफी तंग करती थी। उसने मुकेश पर झूठा दहेज प्रताडऩा का केस भी डाल रखा था। इसके चलते मुकेश परेशान रहता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

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MRA Litrature / Re: For Men by Men
« on: May 04, 2017, 01:23:07 PM »
माना की बदल गया है ज़माने का अंदाज़ वक़्त के साथ
मगर पुरुष की जिम्मेदारियों का बोझ आज भी वहीँ  है

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MRA Litrature / Re: For Men by Men
« on: May 04, 2017, 01:19:08 PM »
अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नही हूँ
वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उसे कहो पुरुष अभी मरा नही है

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MRA Litrature / पत्थर से चोट
« on: May 03, 2017, 07:21:25 PM »
पत्थर से चोट



एक माँ अपने पुत्र को पत्थर मार रही थी मैंने वजह पूछी तो बड़ा मार्मिक उत्तर मिला,
पत्थर से चोट खाने का अभ्यास करवा रही हुँ।
इसको अपनी अधिकारों की रक्षा नारीवादी लोगो के पत्थर खा कर करनी हैं।

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#बराबरी : बेटियों को इतना बड़ा भी न बनाएं कि बेटे बौने पड़ जाएं...

NDTV INDIA

आज आपसे एक अनुभव साझा करना चाहती हूं. मेरे पड़ोस में एक मिश्रा जी रहते हैं. उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं. बेटे की शिक्षा प्राइवेट स्कूल में कराई गई और बेटियों की सरकारी में. बेटे को रात को 8 बजे तक घर से बाहर रहने की आजादी है और बेटियों के स्कूल से सीधे घर में कैद होने का विकल्प... फिर भी वो ये कहते नहीं थकते कि ‘बेटे तो कीड़े हैं, जिंदगी भर खून पीएंगे. पार तो बेटियों ने ही लगाना है’.
 
मैं उनका स्टेट्स समझ नहीं पाती. वो आखिर किसे ज्यादा चाहते हैं. आर्थिक और सामाजिक रूप से वे अपने बेटे को मजबूत बनाते हैं, लेकिन गुणगान बेटियों का करते हैं... क्या व्‍हाट्सऐप, क्या फेसबुक, क्या ट्विटर हर जगह वे – 'प्यारी बेटियां', 'भाग्य से मिलती हैं बेटियां' और ऐसे ही संदेश बांचते फिरते हैं. ऐसा नहीं कि वे अपनी बेटियों को इज्जत नहीं देते. जरा सा पैर क्या छू जाए बेटी को, तुरंत उसके पैर पड़ जाते हैं- 'देवी मां माफ कर दो, माफ कर दो'.
 
मिश्रा जी अकेले ऐसे नहीं. हमारे आसपास ऐसे बहुत लोग हैं. जो बेटी की इज्जत करते हैं, उन्हें प्यार करते हैं. यहां तक कि उन्हें बेटों से ऊपर या बढ़कर मानते हैं. पर मेरा सवाल ये है कि बेटों से ऊपर क्यों, बराबर क्यों नहीं. आखिर क्यों लड़की को ही लक्ष्मी माना जाए. और माना भी जाए, तो लड़कों को कुबेर कहने में क्या हर्ज है... बात आखिर बराबरी की हो रही है ना...
 
यह एक परंपरा सी बन गई है. इंटरनेट भी इससे पटा पड़ा है. जाने कहां से व्‍हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर के लिए रोज नए वॉलपेपर, मेसेज वगैरह के अविष्कार हो रहे हैं. अच्छी बात है. लड़कियों को सम्मान मिलना चाहिए. बराबरी उनका जन्मसिद्ध हक जो है. लिंग के आधार पर भेदभाव या ऊंच-नीच कतई बर्दाश्‍त न की जाए. लेकिन हम किस दिशा या संदर्भ में इस बराबरी की बात कर रहे हैं. हर जगह तो उन्हें बेटों से बेहतर दिखाने की कोशिश होती है. जब बेहतर शब्द आ गया तो बराबरी का विकल्प कहां बचा... बेहतरी की यह लड़ाई दिमागी आधार पर होनी चाहिए, लिंग के आधार पर नहीं. लिंग के आधार पर केवल बराबरी की बात जंचती है.
 
हमारे समाज की यह विसंगति ही तो है कि हम विकास और बराबरी की बातें भी करते हैं, तो भेदभाव का बीज बोते हुए. क्या आपने सोचा है कि लड़कियों को इस तरह आगे बढ़ाने के चक्कर में हमने कितने लड़कों के मन में उनके लिए नफरत भर दी होगी.
 
कुछ दिन पहले एक धार्मिक चैनल पर कोई गुरुदेव जी प्रवचन दे रहे थे. हालांकि मैं गुरु परंपरा से अभी तक बची हुई हूं फिर भी गाहे-बगाहे चैनल बदलते हुए ही कई बार उनकी बातें कानों में पड़ जाती हैं. उन गुरु ने एक कथा सुनाई. जिसमें कहा गया था‍ -
 
'बेटी, बेटों से अच्छी होती हैं. क्योंकि जब बाप रात को देर से लौटता है, तो बेटा कभी नहीं पूछता कि 'पापा खाना खाया क्या'... बेटी जरूर पूछती हैं...'
 
इस बात के आधार पर उन्होंने वहां हजारों की संख्या में बैठे भक्तों की आंखों में आंसू ला दिए. यकीनन उस समय सब अपने बेटों को ही कोस रहे होंगे. लेकिन वो महान गुरु यह बताना तो भूल ही गए कि हमने ही बेटे और बेटी में ये सीख और संस्कार डाले हैं. फिर इसमें बेटे को क्यों दोष देना.
 
बेटा और बेटी का फर्क हमारी अपनी देन है. मैं बस यह कहना चाहती हूं कि जब तक हम यह कम-ज्यादा की तुलना छोड़ कर बराबरी पर नहीं आएंगे, तब तक ये भेद खत्म नहीं हो पाएगा. अब बॉल आपके पाले में है. आज से ही बेटी को अच्छा और बेटे को बुरा कहना बंद करें. उन्हें बराबरी के संस्कार दें. ताकि आने वाले समय में कोई मां ऑफिस, रसोई और बच्चों की जिम्मेदारी सहते हुए बेहतर होने का बोझ न सहे और कोई पुरुष कमतर होने और महिलाओं से बुरा होने का लाभ उठाकर मजे या घृणा की जिंदगी न जीए.

अनिता शर्मा NDTV Convergence में कार्यरत हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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MRA in Action / Re: MRA on Social Media
« on: May 03, 2017, 03:52:17 PM »

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हसो और हसाओ / Re: Husband vs Wife
« on: May 03, 2017, 03:07:42 PM »
Party with Husband


A survey found that 62% people want to party 7 times a week
Figure drastically dropped to 17% when words 'with husband' were added
and it dropped to 0.17% when words 'own husband' were added

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हसो और हसाओ / Husband vs Wife
« on: May 03, 2017, 02:24:12 PM »
तीन तलाक


हिंदुओं को तीन तलाक का अधिकार भले मत दो ...

लेकिन यह कर दो कि जब हिंदू पुरुष अपनी पत्नियों को 3 बार बोले --
...चुप हो जा ..चुप हो जा ..चुप हो जा ..

तो वह  चुप रहे..

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जी हाँ, मैं पुरुष हूँ

माँ के पेट से जब मैं दुनिया में आता हूँ,
परिवार के हर सपने पुरे करने का जरिया बन जाता हूँ ,
कोई मुझे बुढ़ापे का साहरा कहता है तो किसी की आँख का तारा बन जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हूँ ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

बहन के की रक्षा के  लिए दुनिया से लड़ता हूँ,
पिता के सपने पुरे होने का ख्याल भी करता हूँ,
माँ की ख़ुशी के लिए, किसी भी हद से गुज़र जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं एक दिन बलात्कारी कहलता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ।

मुझे कहीं आरक्षण नहीं,
कहीं आयोग नहीं, कोई सुरक्षा नहीं,
न किसी को आभास है मर्द को दर्द होने का, न किसी ने प्रयास किया मेरा हमदर्द होने का,
बस चल रही इस ज़िंदगी में मैं, सब कुछ सह जाता हूँ,
फिर भी मैं बस अत्याचारी और बलात्कारी कहलाता हूँ ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ।

मैं सियाचिन में ठिठुरता हूँ, मैं रोज़ सरहद पर मरता हूँ,
मैं कोयले की कान में काम करता हूँ, मैं देश के गटर साफ़ करता हूँ,
बोलने की आज़ादी तो मिली है मुझे भी,फिर भी मैं अनसुना कर दिया जाता हूँ,
न जाने क्यूँ मैं बस अत्याचारी ही कहलाता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

दिन भर मेहनत कर के मैं घर के लिए कमाता हूँ,
पत्नी की मार खा लू तो ठीक, विरोध करूँ तो असुर बन जाता हूँ,
चुपचाप से सब सह लूँ, तो नपुंसक कहलाता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

ओ समाज के रखवालो, मुझमे भी जान है, भगवान ने महिला को बनाया तो ये पुरुष भी उसी की संतान है।
गर्भ में मरता मैं भी हूँ, हर तरह की प्रताड़ना से डरता मैं भी हूँ ।

ये समझना बड़ी बात नहीं, की मर्द को भी दर्द होता है,
अत्याचार का शिकार होने पर, वो भी अकेले में रोता है ।
माता पिता परिवार का बोझ उठाते उठाते मैं इक दिन दुनिया से ही चला जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं बस, अत्याचारी और बलात्कारी, असुर  ही कहालाता हूँ,

जी हाँ,मैं पुरुष हूँ ।

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MRA Litrature / Re: For Men by Men
« on: May 03, 2017, 01:56:52 PM »
राह संघर्ष की मर्द जो चलता है,
तो ही संसार को बदलता है ।
उसनेे रातों से जंग जीती है,
सूर्य बनकर वही निकलता है !

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