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Topics - gursharn

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News & Information / This is the age when men are the most lonely
« on: May 09, 2017, 02:41:08 PM »
This is the age when men are the most lonely

EVENING STANDARD

Feeling lonely and socially isolated is something that you’d most likely associated with the elderly generation, particularly in the capital.

But according to new research, a ‘silent epidemic’ is sweeping men in their thirties, with millions of men in the UK feeling vulnerable and isolated.

The study by the Jo Cox Commission, which was released as part of Spotlight on Men month, found that an estimated eight million (35 per cent) of men feel lonely at least once a week, while nearly three million (11 per cent) battle with these feelings every day.

Much like mental health, there is a stigma surrounding loneliness, and people tend not to ask for help because of embarrassment.

According to the study's results, more than one in 10 men say they are lonely, but will not admit it to anyone.

The age when men are most likely to hit ‘peak loneliness’ is 35. This could be down to a number of factors including unemployment, relationship break-ups, bereavement or moving away from family and friends.

This is also the age that men are most likely to have few or no regular friends with 9 per cent of 35-year-olds admitting that they do not see anyone regularly.

By 2030, the commission predicts that around 1.5 million men will live alone in England and Wales by 2030. These men are particularly vulnerable to feeling lonely because they are less likely to socialise outside of work and family through activities, the study found.

Labour MP Rachel Reeves, who co-chairs the commission, said: "Loneliness is a silent epidemic hidden inside every family and community in the UK and can affect any one of us and at any time.

"For the next month, we will explore how and why men experience loneliness and, most importantly, shine a light on the practical steps that can be taken to combat it.

"Now is the time to break the silence and start a conversation."

The month-long campaign now aims to start a national conversation about the scale and impact of loneliness in the UK, in a bid to tackle the epidemic.

People can use the hashtag #happytochat on Twitter and Facebook to raise awareness of loneliness among young men.


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सुसाइड नोट में लिखा...पत्नी और ससुर से तंग आकर दे रहा हूँ जान....

PUNJAB KESRI


मोहाली (राणा) : फेज-1 में रहने वाले एक व्यक्ति ने पंखे से फंदा लगा लिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटनास्थल की जांच की। मौके से पुलिस को एक सोसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें पत्नी, सास और अन्यों को मौत के जिम्मेदार ठहराया गया।  पुलिस ने बताया कि मुकेश (39) ने सुसाइड नोट में लिखा कि वह अपनी पत्नी और ससुर से तंग आकर जान दे रहा है। मृतक का पिता बी.एस. अतरी पिंजौर में रहता हैं, जबकि मुकेश मोहाली फेज-1 में अकेला रह रहा था। पहले उसकी 10 साल की बेटी भी साथ रहती थी लेकिन पती-पत्नी में झगड़े के चलते मृतक की पत्नी करीब 6 महीने पहले बेटी को लेकर अपने मायके मुंडी खरड़ चली गई। तब से मुकेश यहां अकेला रह रहा था। मुकेश के पिता ने आरोप लगाया कि विजय लक्ष्मी उनके बेटे को काफी तंग करती थी। उसने मुकेश पर झूठा दहेज प्रताडऩा का केस भी डाल रखा था। इसके चलते मुकेश परेशान रहता था। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

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MRA Litrature / पत्थर से चोट
« on: May 03, 2017, 07:21:25 PM »
पत्थर से चोट



एक माँ अपने पुत्र को पत्थर मार रही थी मैंने वजह पूछी तो बड़ा मार्मिक उत्तर मिला,
पत्थर से चोट खाने का अभ्यास करवा रही हुँ।
इसको अपनी अधिकारों की रक्षा नारीवादी लोगो के पत्थर खा कर करनी हैं।

34
#बराबरी : बेटियों को इतना बड़ा भी न बनाएं कि बेटे बौने पड़ जाएं...

NDTV INDIA

आज आपसे एक अनुभव साझा करना चाहती हूं. मेरे पड़ोस में एक मिश्रा जी रहते हैं. उनके एक बेटा और दो बेटियां हैं. बेटे की शिक्षा प्राइवेट स्कूल में कराई गई और बेटियों की सरकारी में. बेटे को रात को 8 बजे तक घर से बाहर रहने की आजादी है और बेटियों के स्कूल से सीधे घर में कैद होने का विकल्प... फिर भी वो ये कहते नहीं थकते कि ‘बेटे तो कीड़े हैं, जिंदगी भर खून पीएंगे. पार तो बेटियों ने ही लगाना है’.
 
मैं उनका स्टेट्स समझ नहीं पाती. वो आखिर किसे ज्यादा चाहते हैं. आर्थिक और सामाजिक रूप से वे अपने बेटे को मजबूत बनाते हैं, लेकिन गुणगान बेटियों का करते हैं... क्या व्‍हाट्सऐप, क्या फेसबुक, क्या ट्विटर हर जगह वे – 'प्यारी बेटियां', 'भाग्य से मिलती हैं बेटियां' और ऐसे ही संदेश बांचते फिरते हैं. ऐसा नहीं कि वे अपनी बेटियों को इज्जत नहीं देते. जरा सा पैर क्या छू जाए बेटी को, तुरंत उसके पैर पड़ जाते हैं- 'देवी मां माफ कर दो, माफ कर दो'.
 
मिश्रा जी अकेले ऐसे नहीं. हमारे आसपास ऐसे बहुत लोग हैं. जो बेटी की इज्जत करते हैं, उन्हें प्यार करते हैं. यहां तक कि उन्हें बेटों से ऊपर या बढ़कर मानते हैं. पर मेरा सवाल ये है कि बेटों से ऊपर क्यों, बराबर क्यों नहीं. आखिर क्यों लड़की को ही लक्ष्मी माना जाए. और माना भी जाए, तो लड़कों को कुबेर कहने में क्या हर्ज है... बात आखिर बराबरी की हो रही है ना...
 
यह एक परंपरा सी बन गई है. इंटरनेट भी इससे पटा पड़ा है. जाने कहां से व्‍हाट्सऐप, फेसबुक, ट्विटर के लिए रोज नए वॉलपेपर, मेसेज वगैरह के अविष्कार हो रहे हैं. अच्छी बात है. लड़कियों को सम्मान मिलना चाहिए. बराबरी उनका जन्मसिद्ध हक जो है. लिंग के आधार पर भेदभाव या ऊंच-नीच कतई बर्दाश्‍त न की जाए. लेकिन हम किस दिशा या संदर्भ में इस बराबरी की बात कर रहे हैं. हर जगह तो उन्हें बेटों से बेहतर दिखाने की कोशिश होती है. जब बेहतर शब्द आ गया तो बराबरी का विकल्प कहां बचा... बेहतरी की यह लड़ाई दिमागी आधार पर होनी चाहिए, लिंग के आधार पर नहीं. लिंग के आधार पर केवल बराबरी की बात जंचती है.
 
हमारे समाज की यह विसंगति ही तो है कि हम विकास और बराबरी की बातें भी करते हैं, तो भेदभाव का बीज बोते हुए. क्या आपने सोचा है कि लड़कियों को इस तरह आगे बढ़ाने के चक्कर में हमने कितने लड़कों के मन में उनके लिए नफरत भर दी होगी.
 
कुछ दिन पहले एक धार्मिक चैनल पर कोई गुरुदेव जी प्रवचन दे रहे थे. हालांकि मैं गुरु परंपरा से अभी तक बची हुई हूं फिर भी गाहे-बगाहे चैनल बदलते हुए ही कई बार उनकी बातें कानों में पड़ जाती हैं. उन गुरु ने एक कथा सुनाई. जिसमें कहा गया था‍ -
 
'बेटी, बेटों से अच्छी होती हैं. क्योंकि जब बाप रात को देर से लौटता है, तो बेटा कभी नहीं पूछता कि 'पापा खाना खाया क्या'... बेटी जरूर पूछती हैं...'
 
इस बात के आधार पर उन्होंने वहां हजारों की संख्या में बैठे भक्तों की आंखों में आंसू ला दिए. यकीनन उस समय सब अपने बेटों को ही कोस रहे होंगे. लेकिन वो महान गुरु यह बताना तो भूल ही गए कि हमने ही बेटे और बेटी में ये सीख और संस्कार डाले हैं. फिर इसमें बेटे को क्यों दोष देना.
 
बेटा और बेटी का फर्क हमारी अपनी देन है. मैं बस यह कहना चाहती हूं कि जब तक हम यह कम-ज्यादा की तुलना छोड़ कर बराबरी पर नहीं आएंगे, तब तक ये भेद खत्म नहीं हो पाएगा. अब बॉल आपके पाले में है. आज से ही बेटी को अच्छा और बेटे को बुरा कहना बंद करें. उन्हें बराबरी के संस्कार दें. ताकि आने वाले समय में कोई मां ऑफिस, रसोई और बच्चों की जिम्मेदारी सहते हुए बेहतर होने का बोझ न सहे और कोई पुरुष कमतर होने और महिलाओं से बुरा होने का लाभ उठाकर मजे या घृणा की जिंदगी न जीए.

अनिता शर्मा NDTV Convergence में कार्यरत हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति एनडीटीवी उत्तरदायी नहीं है। इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार एनडीटीवी के नहीं हैं, तथा एनडीटीवी उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

35
हसो और हसाओ / Husband vs Wife
« on: May 03, 2017, 02:24:12 PM »
तीन तलाक


हिंदुओं को तीन तलाक का अधिकार भले मत दो ...

लेकिन यह कर दो कि जब हिंदू पुरुष अपनी पत्नियों को 3 बार बोले --
...चुप हो जा ..चुप हो जा ..चुप हो जा ..

तो वह  चुप रहे..

36
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ

माँ के पेट से जब मैं दुनिया में आता हूँ,
परिवार के हर सपने पुरे करने का जरिया बन जाता हूँ ,
कोई मुझे बुढ़ापे का साहरा कहता है तो किसी की आँख का तारा बन जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं अत्याचारी कहलाता हूँ ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

बहन के की रक्षा के  लिए दुनिया से लड़ता हूँ,
पिता के सपने पुरे होने का ख्याल भी करता हूँ,
माँ की ख़ुशी के लिए, किसी भी हद से गुज़र जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं एक दिन बलात्कारी कहलता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ।

मुझे कहीं आरक्षण नहीं,
कहीं आयोग नहीं, कोई सुरक्षा नहीं,
न किसी को आभास है मर्द को दर्द होने का, न किसी ने प्रयास किया मेरा हमदर्द होने का,
बस चल रही इस ज़िंदगी में मैं, सब कुछ सह जाता हूँ,
फिर भी मैं बस अत्याचारी और बलात्कारी कहलाता हूँ ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ।

मैं सियाचिन में ठिठुरता हूँ, मैं रोज़ सरहद पर मरता हूँ,
मैं कोयले की कान में काम करता हूँ, मैं देश के गटर साफ़ करता हूँ,
बोलने की आज़ादी तो मिली है मुझे भी,फिर भी मैं अनसुना कर दिया जाता हूँ,
न जाने क्यूँ मैं बस अत्याचारी ही कहलाता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

दिन भर मेहनत कर के मैं घर के लिए कमाता हूँ,
पत्नी की मार खा लू तो ठीक, विरोध करूँ तो असुर बन जाता हूँ,
चुपचाप से सब सह लूँ, तो नपुंसक कहलाता हूँ,
जी हाँ, मैं पुरुष हूँ ।

ओ समाज के रखवालो, मुझमे भी जान है, भगवान ने महिला को बनाया तो ये पुरुष भी उसी की संतान है।
गर्भ में मरता मैं भी हूँ, हर तरह की प्रताड़ना से डरता मैं भी हूँ ।

ये समझना बड़ी बात नहीं, की मर्द को भी दर्द होता है,
अत्याचार का शिकार होने पर, वो भी अकेले में रोता है ।
माता पिता परिवार का बोझ उठाते उठाते मैं इक दिन दुनिया से ही चला जाता हूँ,
लेकिन फिर भी मैं बस, अत्याचारी और बलात्कारी, असुर  ही कहालाता हूँ,

जी हाँ,मैं पुरुष हूँ ।

37
MRA Litrature / बेटी vs बेटे
« on: May 03, 2017, 01:51:22 PM »
बेटी vs बेटे

यहाँ बनती हैं योजनाएं बेटियों के लिए
पर  कुछ कर गुज़रते हैं बेटे

सुविधाओं का खाद पानी बेटियों को..
पर लहराते हैं बेटे

स्कूल में मुफ्त किताब और शिक्षा बेटियों को.
पर पढ़ जाते हैं बेटे.

समाज का मुफ्त सम्मान बस बेटियों के लिए.
पर सम्मान कमा जाते है बेटे

बिगड़ैल बन कर जब रुलाती हैं बेटियां
तो जिम्मेदार बन कर सब सम्भालते हैब बेटे

नाम करें या न करें बेटियां
पर बाप का नाम रोशन करते हैं बेटे

जब दर्द देती है बेटी.
तब मरहम लगाते हैं बेटे

छोड़ जाती हैं जब बेटियां
तो काम आते हैं बेटे

समाज की जुबां पर बस बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
पर तिस्कार पा कर भी आगे बढ़ जाते हैं बेटे

हजारों फरमाइशें करती है पत्नी बहन बेटियां..
पर खुद का मन मार कर उन्हें पूरा करते हैं बेटे


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MRA Litrature / समाज बचाते है बेटे
« on: May 03, 2017, 01:50:02 PM »
समाज बचाते है बेटे


बिना किसी योजना के कुछ कर गुज़रते हैं बेटे
बिना खाद पानी के लहराते हैं बेटे
बिना किसी सुविधा अपने दम पर पढ़ जाते हैं बेटे.
अपनी मेहनत से सम्मान कमा जाते है बेटे
रोते माँ बाप को जिम्मेदार बन कर सब सम्भालते है बेटे
माँ बाप का नाम रोशन करते हैं बेटे
जब दर्द मिलता है तब मरहम लगाते हैं बेटे
हर मुश्किल मैं काम आते हैं बेटे
तिस्कार पा कर भी आगे बढ़ जाते हैं बेटे
पर खुद का मन मार कर परिवार की खाविहिशे पूरा करते हैं बेटे
रातों को जागकर सबको मीठी नींद सुलाते हैं बेटे
हर मुसीबत मैं छाती तान कर लड़ते है बेटे
फिट भी समाज कहता है किसी काम के नहीं बेटे
समाज की नफरत समेट कर भी समाज बचाते है बेटे 

39
Male victim of domestic violence on a bike campaign

TIMES OF INDIA


CHENNAI: Ameen Shareeff is a man on a mission. The 30-year-old Visakhapatnam resident has been driving his Royal Enfield across the country to spread awareness about male victims of domestic violence. Having opened up about his own personal travails, Shareeff is now determined to get more men to break their silence.

Shareeff, who runs a Facebook page, 'Speak Out Mard', started off from his hometown on January 24. Clad in a bright orange T shirt, a blue bandana around his head, Shareeff, who reached Chennai on Wednesday evening, spent a day in the city, hoping to speak to people about the woes of male victims of domestic violence.

"I didn't even open up to my siblings about what I was going through in my marriage. I was afraid that if I told people, they would laugh at me as usually people do not think a man can suffer physical and verbal abuse and violence in a marriage," says Shareeff, adding that when he decided to voice his problems, he did find help and support, from his siblings and others.

According to Shareeff, his marriage ran into trouble just three months after tying the knot. "I had to cut off from my family, I couldn't sleep even for three hours a night due to the continuous fighting and even suffered physical abuse," claims Shareeff, who has been separated from his wife since September 2016 and longs to see his three-year-old daughter. "I even contemplated suicide but then thought of my daughter and her future. She is my only hope in life."

So he quit his job, gave up the apartment he lived in and decided to hit the road to spread awareness and reach out to people. "I came across people who I thought were doing good but realised they were in similar situations," he says. Shareeff will head to Puducherry on Friday, and plans to travel to places like Rameswaram, Kanyakumari and later Kerala, before winding up his journey in mid-May.


40
MRA Litrature / दही की कीमत
« on: May 02, 2017, 06:57:14 PM »
दही की कीमत

जब एक शख्स लगभग पैंतालीस वर्ष के थे तब उनकी पत्नी का स्वर्गवास हो गया था। लोगों ने दूसरी शादी की सलाह दी परन्तु उन्होंने यह कहकर मना कर दिया कि पुत्र के रूप में पत्नी की दी हुई भेंट मेरे पास हैं, इसी के साथ पूरी जिन्दगी अच्छे से कट जाएगी।

पुत्र जब वयस्क हुआ तो पूरा कारोबार पुत्र के हवाले कर दिया। स्वयं कभी अपने तो कभी दोस्तों के आॅफिस में बैठकर समय व्यतीत करने लगे।

पुत्र की शादी के बाद वह ओर अधिक निश्चित हो गये। पूरा घर बहू को सुपुर्द कर दिया।

पुत्र की शादी के लगभग एक वर्ष बाद दोहपर में खाना खा रहे थे, पुत्र भी लंच करने ऑफिस से आ गया था और हाथ–मुँह धोकर खाना खाने की तैयारी कर रहा था।

उसने सुना कि पिता जी ने बहू से खाने के साथ दही माँगा और बहू ने जवाब दिया कि आज घर में दही उपलब्ध नहीं है। खाना खाकर पिताजी ऑफिस चले गये।

थोडी देर बाद पुत्र अपनी पत्नी के साथ खाना खाने बैठा। खाने में प्याला भरा हुआ दही भी था। पुत्र ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और खाना खाकर स्वयं भी ऑफिस चला गया।

कुछ दिन बाद पुत्र ने अपने पिताजी से कहा- ‘‘पापा आज आपको कोर्ट चलना है, आज आपका विवाह होने जा रहा है।’’

पिता ने आश्चर्य से पुत्र की तरफ देखा और कहा-‘‘बेटा मुझे पत्नी की आवश्यकता नही है और मैं तुझे इतना स्नेह देता हूँ कि शायद तुझे भी माँ की जरूरत नहीं है, फिर दूसरा विवाह क्यों?’’

पुत्र ने कहा ‘‘ पिता जी, न तो मै अपने लिए माँ ला रहा हूँ न आपके लिए पत्नी, मैं तो केवल आपके लिये दही का इन्तजाम कर रहा हूँ।

कल से मै किराए के मकान मे आपकी बहू के साथ रहूँगा तथा आपके ऑफिस मे एक कर्मचारी की तरह वेतन लूँगा ताकि आपकी बहू को दही की कीमत का पता चले।’

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DAINIK BHASKAR

गोरखपुर. यूपी के गोरखपुर में 22 अप्रैल की रात एक महिला ने ब्वॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति की हत्या कर दी। अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है। कैंट पुलि‍स के मुताबिक, आरोपी ने बताया कि महिला ने मेरे साथ मिलकर अपने पति की हत्या की लेकिन उसके बेटे ने ये सब देख लि‍या था। मैंने उससे (प्रेमि‍का) से कहा, इसे भी मार देते हैं। इस पर वो बोली- ये तो इस परिवार का वारिस है और फि‍र तुम्हारा ही तो बेटा है। इसे मत मारो। बता दें, इस मामले में अब तक आरोपी महि‍ला, उसके ब्वॉयफ्रेंड और एक साथी को गि‍रफ्तार कि‍या गया है। 12 साल से था महि‍ला का अफेयर...

- सीओ कैंट अभय मिश्रा ने मीड‍िया को बताया, ''लोगों का कहना है क‍ि मृतक विवेक प्रताप सिंह (35) की हत्या प्रेम प्रसंग के चलते की गई है। व‍िवेक की पत्नी सुषमा सिंह का मायके के डब्ल्यू सिंह से शादी से पहले करीब 12 साल तक अफेयर रहा।''
- ''यही नहीं, डब्ल्यू अक्सर मोहल्ले में भी दिखाई देता था और कई बार व‍िवेक और उनके परिजनों की गैर मौजूदगी में सुषमा के घर भी अाता था। इसकी जानकारी व‍िवेक को भी हो गई थी और उसने पत्नी पर कड़ा पहरा बिठा दिया था।''
- ''पूरी प्लान‍िंग के तहत ही 22 अप्रैल की रात डब्ल्यू अपने गांव के सोनू, राधेश्याम सिंह और अनिल मौर्या के साथ कैंट इलाके के विशुनपुरवा गांव स्थ‍ित व‍िवेक के घर पहुंचा और सुषमा की ही मदद से उसने व‍िवेक की हत्या कर दी।''
बेटा बोला- मम्मी ने अंकल के साथ मिलकर पापा को मार दिया
- ज‍िस समय वारदात को अंजाम द‍िया गया, कमरे में सुषमा का बेटा आरुष (6) मौजूद था। उसने पूरी घटना की जानकारी बुआ को दी।
- पुल‍िस के मुताबिक, आरुष ने बुआ से बताया, ''रात में मम्मी ने दरवाजा खोला तो 3 अंकल कमरे घुस आए। मैंने चिल्लाने की कोश‍िश की तो मेरा मुंह दबा दिया। इसके बाद उन लोगों ने पापा का गला दबाया। फ‍िर उन्हें बेड से नीचे उतारकर ईंट से मारा। पापा का बहुत खून निकल रहा था। इसके बाद वो लोग पापा को कहीं ले गए और मम्मी जमीन पर पर गिरा खून साफ करने लगीं। इसी दौरान पुल‍िस आ गई।''
घर में क‍िसीको नहीं हुई घटना की जानकारी
- पुलिस ने बताया कि मृतक व‍िवेक का रूम फर्स्ट फ्लोर पर है। उसके बगल में उसके चाचा कृष्ण प्रताप सिंह और चाची दुर्गा सिंह रहते हैं। दोनों रात में अपने कमरे में ही थे, लेकिन उनका कहना है क‍ि उन्हें घटना की जानकारी नहीं हुई।
- इसी तरह ग्राउंड फ्लोर पर मृतक के पिता देवेंद्र प्रताप सिंह अपनी पत्नी लक्ष्मी सिंह के साथ सो रहे थे। उनका भी यही कहना है क‍ि घटना कब हुई, उन्हें पता ही नहीं चला।
- पुल‍िस के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है क‍ि इतनी बड़ी घटना हो गई और कैसे घर के बाकी मेंबर्स को इसका पता नहीं चला। आरोपियों से और पूछताछ के बाद कई चीजें सामने आ सकती हैं।
एक महीने पहले ही जेल सेछूटा था महिला का ब्वॉयफ्रेंड
- सीओ कैंट अभय मिश्रा ने बताया क‍ि सुषमा का प्रेमी डब्ल्यू 1 महीने पहले ही जेल से छूटा है। वो हत्या के आरोप में जेल में था। उस पर हत्या और लूट के करीब 12 केस दर्ज हैं।
- डब्ल्यू खूंखार बदमाश चंदन सिंह के गिरोह का मेंबर है। चंदन भी जेल में बंद है।

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MRA Litrature / The Male Factor
« on: May 01, 2017, 07:34:42 PM »
I married a divorced woman and this is what happened

A man from Vizag, Mr. Ameen Shareeff is concluding his cross country bike ride for a cause. The Male Factor was fortunate to get his precious time for an interview to understand more about his ride and mission. Here is his interview –

Q. Hi Ameen, thanks for agreeing to this interview. First, I would like to know your story behind the cross country bike ride?

A. We were a very close knit family of three brothers and one sister. We lost our parents two years ago. My sister is a divorcee with two children so I always had a soft corner towards divorcee women. So, even though it was my first marriage, I decided to marry a divorcee.



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MRA Litrature / Men's HUB : Issue 001
« on: April 25, 2017, 05:28:57 PM »
Men's HUB Issue 001

01/01/2016

DOWNLOAD LINK 01



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MRA Litrature / For Men by Men
« on: April 25, 2017, 02:03:13 PM »
When it comes to men's personal health,
we men are like ostriches
we bury our heads in the sand and hope the problem goes away

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MRA Activities / Satyagrah on 29/04/2017 at Jantra Mantra, Delhi
« on: April 24, 2017, 03:45:37 PM »

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